‼ *आंबेडकर सांस्कृतिक भवन को समाज के दलालों द्वारा गिराने का षड्यंत्र*‼

आंबेडकरी मूवमेंट का एक प्रमुख केन्द्रस्थान है‌

नागपुर के क्रांतिकारी भूमि में स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन यह आंबेडकरी मूवमेंट का एक प्रमुख केन्द्रस्थान है।यह भवन नागपुर नगरी के उरुवेला कॉलोनी इस इलाखे मे है जहाँ ९० फीसदी लोग बौद्ध धम्म के है।

आंबेडकरी और बौद्ध धम्म के कई कार्यक्रम होते है

इस भवन में आंबेडकरी और बौद्ध धम्म के कई कार्यक्रम होते है यही नही बल्कि यहा मूवमेंट के बारे में चर्चा,विचारविमर्श, सभाएं इत्यादि भी होते है। यहा आंबेडकरी मूवमेंट में कार्यरत कोई भी सामाजिक,शैक्षणिक, राजनैतिक,सांस्कृतिक संघटन हो उनको कार्यक्रम करने के लिए इस भवन की दरवाजे हमेशा खुली रहती है।

एजुकेशनल एक्टिविटी होती है

इस भवन में “बुद्ध एंड हिज धम्म”,”डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अभिवादन प्रश्नोत्तरी परीक्षा”, “अभियांत्रिकी विद्यार्थियों के लिए कार्यशालाएं”, “बिज़नेस से संबंधित कार्यशालाएं”, “सरकारी कर्मचारियों की समस्याएं जैसे कि आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण”,”बुद्ध विहारों के संरक्षित करने के लिए होने वाली सभाएं” इत्यादि समाजहित की गतिविधियां चलती है।

 खूंन पसीने की कमाई से बना हुआ है

यह भवन सामाजिक दायित्व रखनेवाले लोगोके खूंन पसीने की कमाई से बना हुआ है और यह भवन गत ३० सालो से आंबेडकरी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण स्थल बन के उभरा है।किंतु कुछ क्षुल्लक कारणों के कारण आज इस भवन को और आंबेडकरी आंदोलन को ध्वस्त करने की बोहोत बड़ी साजिश सत्ताधारी पार्टी और अपने समाज  के कुछ गद्दारो द्वारा चलाई जा रही है।

कौन ध्वस्त करना चाहता है

यहाँ रहनेवाले कुछ बीजेपी के दलाल /ब्राह्मण अपने स्वार्थ के लिए इस क्षेत्र की बीजेपी पार्षद श्रीमती लक्ष्मी यादव (मुन्ना यादव की पत्नी) जो कि माननीय मुख्यमंत्री की बोहोत करीबी है उसको साथ लेकर इस आंबेडकरी केंद्र को ध्वस्त करने को उतावले हो रहे है।इसी कड़ी के तहत *दिनांक २६/९/२०१८ को आंबेडकर सांस्कृतिक भवन पर दोपहर २.३० बजे महानगर पालिका का दस्ता बुलडोजर के साथ इस भवन को गिराने के लिए आया था।

बीजेपी नेताओ की चाल

जब इस दस्ते से बातचीत चल रही थी उसी वक़्त इस क्षेत्र की पार्षद लक्ष्मी यादव भवन परिसर में पहुची और नगरपालिका के अधिकारियों पर भवन गिराने के लिए दबाव डाल रही थी,साथ ही इस पार्षद ने अधिकारियों को गाली गलोच करते हुए सस्पेंड करने की धमकी दी*।

आरएसएस का भी हाथ हो सकता है

इससे ऐसा प्रतीत होता है यहां की पार्षद और यहाँ के दलाल लोग बीजेपी नेताओं और आरएसएस के इशारों पर इस भवन को और आंबेडकरी आंदोलन के गढ़ को नेस्तनाबूद करने पर तुले है। किन्तु नागपुर की आंबेडकरी जनता को ऐसे लोगो के मनसूबे कामयाब नही होने देना है।जैसे पुरातन काल मे मनुवादियों ने बौद्धो के विहारो,विद्यापीठों को नेस्तनाबूद किया था उसी तरह आज ये मनुवादी लोग समाज के गद्दारो को साथ लेकर आंबेडकरी आंदोलन के केंद्रों को उध्वस्त कर रहे है।

हाल ही में इन मनुवादियोंने मुम्बई में समाज के गद्दारों को साथ लेकर मुंबई के दादर इलाखे में स्थित आंबेडकर भवन को उध्वस्त किया था।हम कब तक ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करेंगे और हमारे एक एक केंद्र को उध्वस्त होते हुए देखेंगे।

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आंबेडकरी योद्धाओ हमे जागना होगा

आंबेडकरी योद्धाओ हमे जागना होगा और ऐसी मनुवादियों शक्तियों को समाज के दलालों को मुंह तोड़ जवाब देना होगा।नही तो इस तरह के दलाल/ब्राह्मण लोग समाज को और आंबेडकरी आंदोलन को दिमग की तरह खा लेंगे।ऐसे दलाल लोग खाते तो बाबासाहेब के नाम पर लेकिन काम मनुवादियों का करते है ।

हमे इनसे सावधान रहना होगा

हमे इनसे सावधान रहना होगा नही तो वो दिन दूर नही जब मनुवादी लोग ऐसे दलालो को साथ लेकर फिरसे हम लोगों के गले मे मटका और कमर में झाडू बांध देंगे।नागपुर की आंबेडकरी जनता को अभी सोचना पड़ेगा कि उनको अपने  आंबेडकरी केंद्र को बचाना है या आंखे मूँद कर इन मनुवादियों के और दलालों के षडयंत्र में कामयाब होते हुए देखना है।

हमे ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि भविष्य में आंबेडकरी समाज मे गद्दार पैदा ना हो इसलिए हमें ऐसे गद्दारों को सबक सिखाना पड़ेगा इसके लिए हमे इन गद्दारों से रोटी बेटी व्यवहार बंद कर देना होगा और इनको हम समाज से बहिष्कृत कर देना ताकि इनको पता चले कि समाज की असली ताकत क्या होती है।

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सारांश:

आइये एकजूट होकर समाज के इस केंद्र को बचाते है और आंबेडकरी मूवमेंट को गतिमान करते है। *डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन बचाओ आंदोलन*

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2 thoughts on “आंबेडकर सांस्कृतिक भवन को समाज के दलालों द्वारा गिराने का षड्यंत्र | डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन

  1. अपने समाज को जगरूक करने के लिये अच्छा है, आप कि कोशिश सफल होगी |

    1. धन्येवाद जी, आप लोगो का ऐसे ही साथ और सहयोग रहा तो ये हो सकता है। और मेरा मानना है कि इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है।

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