497 एक सुनियोजित षड्यंत्र

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पुरुषों को दूसरी विवाहित महिला से सहमति से संबंध बनाने पर जेल नहीं होगी यह कह कर सुप्रीम कोर्ट ने  धारा 497 हटाई.

बाबाओं को बचाने की साज़िश

कई लोग इस फैसले पर चटकारा लें रहे हैं परन्तु हमारा मानना है कि ये फैसला राजनैतिक लोगों/पूंजीपतियों/मनुवादियों/बाबाओं को बचाने के लिए बहुत बड़ी सोची समझी साजिश के तहत लिया गया है.

महिला विरोधी कानून

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पूरी तरह से महिला विरोधी फैसला है, जिसमें गरीब दलित आदिवासी व अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ जबरन बलात्कार को महिला की सहमति का नाम देकर आरोपियों को खुला छोड़ बलात्कार करने का लाइसेंस दिया गया है.

ट्रफ़फ़िकिंग के मामले बढ़ेंगे

कोर्ट के इस फैसले से ट्रफ़फ़िकिंग के मामले बढ़ेंगे उन्हें कोठों पर बेचा जायेगा और उनके साथ तरह तरह के उत्पीड़न कर उनसे कहलवाया जायेगा कि वे अपनी  सहमति से कोठे पर आयी है व किसी भी पुरुष के सम्बन्ध बनाने पर उसकी सहमति है.

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महिलाओं पर अत्याचार बढेगा

497 हटाये जाने से महिला उत्पीड़न को बढ़ावा मिलेगा,  राजनैतिक पार्टियों के नेता अपनी गुंडागर्दी व दहशत फैलाने में कामयाब रहेंगे,  किसी को जाति व धर्म के नाम पर दबाकर रखना है तो वह किसी के भी घर की महिला को उठाकर ले जायेगा अपने गंदे मनसूबे को अंजाम देगा व उसके खिलाफ कंप्लेंट करवाने की कोशिश की तो उस  महिला पर ही सहमति से सम्बन्ध बनाने का आरोप लगा देगा.

नेताओ और बड़े लोगो का बचाव होगा

अबतक जितने बाबाओं व BJP के नेताओं पर बलात्कारी के मामले चल रहे हैं इनमें से कइयों को उम्रकैद हो चुकी है, आगे आने वाले समय में हिन्दुओं का कोई और बाबा धर्म की आड़ में महिलाओं को हवस का शिकार तो बना ले पर  जेल में न जा पाए उनके लिए ये फैसला कोर्ट ने लिया है, राजनीती में बैठे मनुवादी नेता गरीब दलित आदिवासी अल्पसंख्यक महिलाओं को अपनी हवस तो बना ले पर उनके खिलाफ कोई कारवाही न हो सके उसको सजा न हो सके उसकी सुरक्षा के लिए ये फैसला कोर्ट ने लिया है.

यदि कोई पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है लेकिन उसके पति की सहमति नहीं लेता है तो उसे पांच साल की जेल होगी. लेकिन जब पति किसी दूसरी महिला के साथ संबंध बनाता है तो उसे अपने पत्नी की सहमति की कोई जरुरत नहीं है.

सारांश :

जो भी कोई ऐसी महिला के साथ, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है और जिसका किसी अन्य पुरुष की पत्नी होना वह विश्वास पूर्वक जानता है, बिना उसके पति की सहमति या उपेक्षा के शारीरिक संबंध बनाता है जो कि बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता, वह व्यभिचार के अपराध का दोषी होगा, और उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा। ऐसे मामले में पत्नी दुष्प्रेरक के रूप में दण्डनीय नहीं होगी।

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अपराधव्यभिचार

सजा – 5 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों
यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के न्यायधीश द्वारा विचारणीय है I
यह अपराध महिला के पति की सहमति द्वारा समझौता करने योग्य है।

 

 

 

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